अपने मालिक का में नाम लेकर
बज़्म की इब्तिदा कर रहा हूँ
या खुदा आबरू रख मेरी तू
तेरी हम्दो सना कर रहा हूँ
तू जो चाहे तो बन जाये किस्मत
मेरे सजदों की क्या है हकीकत
तेरी चौखट पे सर को झुका कर
फ़र्ज़ अपना अदा कर रहा हूँ
अपने मालिक का में नाम लेकर
बज़्म की इब्तिदा कर रहा हूँ
मेने दुनिया का देखा नज़ारा
अल-मदद केह के मैंने पुकारा
मुझको अपनी पनाहों में रखना
बस यही इल्तिजा कर रहा हूँ
अपने मालिक का में नाम लेकर
बज़्म की इब्तिदा कर रहा हूँ
आज महफ़िल में बैठे हैं जितने
सब के दिल की तमन्ना हो पूरी
सब को हाजी बना दे तू मौला
में तड़प कर दुआ कर रहा हूँ
अपने मालिक का में नाम लेकर
बज़्म की इब्तिदा कर रहा हूँ
अपने महबूब का दर दिखा दे
मेरा सोया मुक़द्दर जगा दे
लुत्फे दुनिया को ले आज से में
अपने दिल से जुदा कर रहा हूँ
अपने मालिक का में नाम लेकर
बज़्म की इब्तिदा कर रहा हूँ
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