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ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकारा | ले हम भी हैं सफ़-आरा

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ए दुश्मन-ए-दीं ! तूने किस क़ौम को ललकारा | ले हम भी हैं सफ़-आरा

अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर
अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर
ले हम भी हैं सफ-आरा ले हम भी हैं सफ-आरा

ए दुश्मने-दीं तूने किस क़ौम को ललकारा
ले हम भी हैं सफ-आरा ले हम भी हैं सफ-आरा

आ देख ये बाज़ू , बाज़ू हैं के तलवारें
सीने हैं जवानों के , या आहनी दीवारें
मिल जाती हैं क़दमों से किस तरह से दस्तारें
हम तुझको दिखा देंगे सो बार ये नज़्ज़ारा

ए दुश्मने-दीं तूने किस क़ौम को ललकारा
ले हम भी हैं सफ-आरा ले हम भी हैं सफ-आरा

जिस राह से आएगा , उस राह से मारेंगे
मुड कर भी न देखेगा , यूँ नशा उतारेंगे
हम मौत की वादी से यूँ तुझको गुज़ारेंगे
इस क़ौम से लड़ने की हिम्मत ना हो दोबारा

ए दुश्मने-दीं तूने किस क़ौम को ललकारा
ले हम भी हैं सफ-आरा ले हम भी हैं सफ-आरा

इस क़ौम का हर बच्चा , अल्लाह का सिपाही है
इस ख़ाक का हर ज़र्रा , तक़दीर इलाही है
इस खित्ते का हर गोशा , इक ज़िंदा गवाही है
इमां का है गेहवारा , इमां का है गेहवारा

ए दुश्मने-दीं तूने किस क़ौम को ललकारा
ले हम भी हैं सफ-आरा ले हम भी हैं सफ-आरा

आ देख ये बाज़ू , बाज़ू हैं के तलवारें
सीने हैं जवानों के , या आहनी दीवारें
मिल जाती हैं क़दमों से किस तरह से दस्तारें
हम तुझको दिखा देंगे सो बार ये नज़्ज़ारा

 

ऐ दुश्मन ए दीन तूने किस कोम को ललकारा रिंगटोन डाउनलोड करें…

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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