बारह रबीउल अव्वल के दिन अब्रे बहारां छाए
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए
आमेना तेरे घर आ कर जिब्रील पयाम ये लाए
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए
दूर हुआ दुनिया से अँधेरा , आये आक़ा हुआ सवेरा
अब्दुल्लाह के घर आँगन खुशियों के बादल छाए
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए
सूखी थीं गुलशन में कलियाँ, सुनी थीं मक्के की गलियां
उनके क़दम से चारों जानिब हो गए नूर के साये
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए
जो है सब नबियों के रहबर, सारे मसीहा, खल्क के रहबर
झोली भरना काम है जिनका , आज वो दाता आए
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए
मुश्किल तेरी ताल जायेगी, सुखी खेती फल जाएगी
दाई हलीमा तेरे सोये भाग जगाने आए
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए
मुज को मिला पैगाम ये मोहसिन, दुनिया को बतलादे मोहसिन
जो है नबी का चाहने वाला, अपने घर को सजाए
मेरे सरकार आए मेरे सरकार आए
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