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फ़ज़्ले रब्बे पाक से बेटा मेरा दूल्हा बना || मदनी सेहरा

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फ़ज़्ले रब्बे पाक से बेटा मेरा दूल्हा बना || मदनी सेहरा
दूल्हा बना दूल्हा बना
दूल्हा बना दूल्हा बना

फ़ज़ल-ए-रब्ब-ए-पाक से बेटा मेरा दूल्हा बना
खुशनुमा खुशरंग फूलों का है सर सेहरा सजा

दूल्हा बना दूल्हा बना

इनको खुशियां दो जहाँ में तू अता कर किब्रिया
इनपे रंज-ओ-ग़म की न छाये कभी काली घटा

दूल्हा बना दूल्हा बना

तू सदा रखना सलामत इनका झोड़ा या खुदा !
कोई भी झगड़ा न हो आपस में अये रब्ब-उल-उला !

दूल्हा बना दूल्हा बना

मीठे मीठे हों मदीने के इन्हें मुन्ने अता
मीठी मीठी हों मदीने की इन्हें मुन्निया अता
वास्ता या रब्ब मदीने की मुबारक ख़ाक का

दूल्हा बना दूल्हा बना

इस तरह महका करे ये घर का घर सब या खुदा !
फूल जैसा के महकते हैं मदीने के सदा

दूल्हा बना दूल्हा बना

आफत-ए-फैशन से हर दम इनको तू मौला ! बचा
या इलाही ! इनका घर गहवारा-ए-सुन्नत बना

दूल्हा बना दूल्हा बना

या इलाही ! दे सआदत हज्ज की इनको बार-बार
बार-बार इनको दिखा , मीठे मुहम्मद का दयार

दूल्हा बना दूल्हा बना

दूल्हा-दुल्हन आफ़ियत से उम्र बिताएं दराज़
दो जहाँ की ने'मतों से भी इन्हें मौला ! नवाज़

दूल्हा बना दूल्हा बना

ये मियाँ-बीवी रहे जन्नत में भी यकजा अये खुदा !
या इलाही ! है यही अत्तार के दिल की दुआ
 
दूल्हा बना दूल्हा बना
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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