कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
वो शाह-ए-दीं वो पैगम्बरों के इमाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
जिनकी तारीफ अल्लाह ताला करें
उनकी तारीफ बेहतर कोई क्या करे
वो हैं आक़ा हमारे हम हैं उनके गुलाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कौन केहता है वो हैं अरब के लिए
मुस्तफा जाने रहमत है सबके लिए
जिनपे नाज़िल हुआ है खुदा का कलाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
सारे आलम में फैज़ान-ए उम्मती
मौत आएगी आखिर कहीं ना कहीं
बख्शवायेंगे पैग़म्बरों के इमाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कलमा पढ़ते हुए जब निकल जाए दम
फिर ऐ समझो की पाया है बागे इरम
उनको आका पिलायेंगे कौशर का जाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
नाम लेने से दरदे दिल होता है कम
इसलिए नाम आका के लेते हैं हम
मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम
शमए बज्मे हिदायत पे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
झुम कर लिख रहा है ये मेरा कलम
शहर-ए-यारे इरम ताजदारे हरम
नौ-बहारे शफ़ाअत पे लाखों सलाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
वो शाह-ए-दीं वो पैगम्बरों के इमाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
वो शाह-ए-दीं वो पैगम्बरों के इमाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
जिनकी तारीफ अल्लाह ताला करें
उनकी तारीफ बेहतर कोई क्या करे
वो हैं आक़ा हमारे हम हैं उनके गुलाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कौन केहता है वो हैं अरब के लिए
मुस्तफा जाने रहमत है सबके लिए
जिनपे नाज़िल हुआ है खुदा का कलाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
सारे आलम में फैज़ान-ए उम्मती
मौत आएगी आखिर कहीं ना कहीं
बख्शवायेंगे पैग़म्बरों के इमाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कलमा पढ़ते हुए जब निकल जाए दम
फिर ऐ समझो की पाया है बागे इरम
उनको आका पिलायेंगे कौशर का जाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
नाम लेने से दरदे दिल होता है कम
इसलिए नाम आका के लेते हैं हम
मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम
शमए बज्मे हिदायत पे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
झुम कर लिख रहा है ये मेरा कलम
शहर-ए-यारे इरम ताजदारे हरम
नौ-बहारे शफ़ाअत पे लाखों सलाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
कितना प्यारा है प्यारे मुहम्मद का नाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
वो शाह-ए-दीं वो पैगम्बरों के इमाम
उनपे लाखों दुरूद उनपे लाखों सलाम
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