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मेरे आका की रहमत पे लाखो सलाम। ताजदारे रिसालत पे लाखो सलाम।

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मेरे आका की रहमत पे लाखो सलाम। ताजदारे रिसालत पे लाखो सलाम।

मेरे आका की रहमत पे लाखो सलाम।

ताजदारे रिसालत पे लाखो सलाम।

 

अंधेरी दुनिया में जब के उजाला हुआ। आगया नूर और सवेरा हुआ। काबा भी जुमके ऐ कहेंने लगा। मुस्तफा की विलादत पे लाखो सलाम।

 

तमन्ना ए मूसा दिदारे खुदा। रद्द करदी खुदाने

उनकी ए दुआ। ए मरतबा हमारे नबी को मिला।

ऐसी शान और शौकत पे लाखो सलाम।

 

अबुबक्रो उमर उस्मानो अली। चारो यारो की अजमत पे लाखो सलाम। यकीनन हर सहाबी जन्नती है । ऐसी किस्मत वालो पे लाखो सलाम।

 

मेरे गौसुल वरा की ऐ शान है। जो की सारे वलियो का सरदार है। जो की अल्लाह का प्यारा और मुख्तार है। ताजदारे विलायत पे लाखो सलाम।

 

सखावत जिनकी दुनिया में मशहूर है।मेरे ख्वाजा पिया की वो जात है। जो अताऐ रसूल से भी मशहूर है। ख्वाजा की सखावत पे लाखो सलाम।

 

दावते इस्लामी ने जो काम किया। फेजाने रजा को आम किया। मुस्तफा जाने रहमत को खुश कर दिया।ऐसे पीरो की निस्बत पे लाखो सलाम।

 

कच्छ के शहंशाह  हाजीपीर औलिया और मुफ्ती ए कच्छ की क्या बात है ।जहालत को जिनूने मिटा कर रख दिया।

ऐसे पीरो की अजमत पे लाखो सलाम।

 

महेशहर में मुझसे पूछे खुदा। ऐ बंदे तू दुनिया से लाया है क्या।कहेदुगा लाया हु अहमद रजा। मसलके आला हजरत पे लाखो सलाम।

 

अहले बैत की शान में क्या कहूं। गराना ए मुस्तफा पे करोड़ो दूरुद। ताजीमे अहले बैत हम पर फर्ज है। एसी शान और अजमत पे लाखो सलाम।

 

ऐ सलाम मेरा मकबूल हो। "महेताब" का गम अब दूर हो। दिल उसका भी अब पुरनूर हो। मुस्तफा की समायत पे लाखो सलाम।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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