ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
जिन्न-ओ-मलाइक तेरे ग़ुलाम
सब से सिवा है तेरा मक़ाम
यासीन-ओ-ताहा तेरे ही नाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
सब को मुयस्सर हो ये मक़ाम
पहुँचें मदीने बन कर ग़ुलाम
पढ़ते दुरूद और पढ़ते सलाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
'अर्श-ए-बरीं तक चर्चा तेरा
शम्स-ओ-क़मर है सदक़ा तेरा
ऐ माह-ए-कामिल हुस्न-ए-तमाम !
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
ज़ुल्फ़ों की ख़ुश्बू हर साँस में
जन्नत-ब-दामाँ एहसास में
आँखों में आँसू, होंटों पे नाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
जूद-ओ-सख़ा का परचम तू ही
ज़ख़्म-ए-जिगर का मरहम तू ही
मुश्किल-कुशाई तेरा ही काम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
ऐ जान-ए-जानाँ ! जान-ए-जहाँ !
शादाँ कि तुम हो शाह-ए-शहाँ
नाज़ाँ कि हम हैं अदना ग़ुलाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
रब की ख़ुशी है मंशा तेरा
मंशा-ए-रब है तेरी रज़ा
तेरा सुख़न है रब का कलाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
रोज़-ए-अज़ल जो चमका था नूर
महशर में होगा उस का ज़ुहूर
अव्वल से आख़िर तेरा ही नाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
तेरी ज़िया से शम्स-ओ-क़मर
तेरा तसव्वुर नूर-ए-बसर
रख़्शाँ दरख़्शाँ हर सुब्ह-ओ-शाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
तेरी सना है मेरा नसीब
क़ुर्बान तुझ पर जान-ए-अदीब
तुझ पर तसद्दुक़ 'आलम तमाम
ख़ैर-उल-बशर पर लाखों सलाम
लाखों दुरूद और लाखों सलाम
शायर:
अदीब रायपुरी
ना'त-ख़्वाँ:
अल्हाज ख़ुर्शीद अहमद
ओवैस रज़ा क़ादरी
हाजी मुश्ताक़ अत्तारी
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