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सजदा साहू का तरीका

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सजदा साहू का तरीका
  • सजदा सहु क्या है ? / sajda sahu kya hai ?
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सजदा सहु में सहु का मतलब है भूलना | नमाज़ में जो बातें वाजिब हैं उनमें से अगर कोई वाजिब भूल कर छुट जाये या नमाज़ में किसी किस्म की कमी या  ज्यादती हो जाये तो  इस कमी या भूल को दूर करने के लिए शरियत ने सजदा सहु यानी भूल का सजदा करने का हुक्म दिया है सजदा सहु करने से नमाज़ पूरी हो जाती है, नमाज़ दोहराने की ज़रुरत नहीं लेकिन अगर सजदा सहु न किया तो नमाज़ फिर से पढनी पड़ेगी | 

 

  • मसला / Mas'ala
नमाज़ में अगर कोई फ़र्ज़ जैसे रुकु या सजदा छुट गया, भूल कर हो या जान बूझ कर या कोई वाजिब क़सदन छोड़ दिया तो फिर सजदा सहु से काम नही चलेगा । नमाज़ फिर से पढनी पड़ेगी 

 

  • सजदा सहु को लेकर चंद हदीसे मुबारका \ Hadees Shareef
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  1. हज़रत मुगीरा बिन शाअबा रज़िअल्लाहू अन्हु से मर्वी है के एक बार नबीये अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दो रकत पढ़कर खड़े हो गए बैठे नही फिर सलाम के बाद सजदा सहु किया |
  2. हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसउद रज़िअल्लाहू अन्हु से मर्वी है के सरवरे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जोहर की नामाज पढाई तो आप ने सलाम के बाद सहु के दो सजदे किये |
  3. हज़रत इमरान बिन हसीन रज़िअल्लाहू अन्हु से मर्वी है के एक बार हुजुरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सहु के सजदे सलाम के बाद किये। इस हदीस को हज़रत इमरान के अलावा हज़रत आयेशा सिद्दीका रज़िअल्लाहू अन्हा , हज़रत अबू हुरौरह रज़िअल्लाहू अन्हु , हज़रत मुगीरा बिन सअबा रज़िअल्लाहू अन्हु और हज़रत साअद बिन वक्कास रज़िअल्लाहू अन्हु ने भी रिवायत किया है 
  4. हज़रत सोबान रज़िअल्लाहू अन्हु से मर्वी है के रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम  ने फ़रमाया के सहु के लिए सलाम के बाद दो सजदा हैं 

 

सजदा सहु कब वाजिब होता है / Sajda sahu kab waajib hota hai 

 

  1. नमाज़ के वाजिबात में से कोई वाजिब भूल कर छूट जाये मसलन फ़र्ज़ की पहले दो रकतों में सुरह फ़ातिहा भूल जाये या सुरह भूल जाये तो सजदा सहु वाजिब हो जायगा 

  2. किसी वाजिब को उसकी जगह से आगे या पीछे कर दे मसलन सुरह पहले पढ़े और उसके बाद सुरह फ़ातिहा पढ़े तो सजदा सहु वाजिब हो जायगा 

  3. किसी वाजिब की अदाएगी में एक रुक्न यानी तीन बार सुबहानल्लाह कहने की मिकदार बराबर वक़्त तक कुछ सोचते रहे तो सजदा सहु वाजिब हो जायगा  

  4. किसी वाजिब को दो बार अदा करने से  सजदा सहु वाजिब हो जायगा 

  5. किसी वाजिब को बदल दे मसलन इमाम ज़ाहिरी नमाज़ में अहिस्ता और सिर्री में बुलंद आवाज़ से करात करे तो तो सजदा सहु वाजिब हो जायगा 

  6. नमाज़ के फर्जों में से किसी फ़र्ज़ को उसकी जगह से हटा कर बाद में अदा करे मसलन पहले सजदा बाद में रुकुह करे तो सजदा सहु वाजिब हो जायगा | 

 

सजदा सहु का तरीका / Sajda sahu ka tarika

क़ायदा ए आखीरा में पूरी अत्ताहियात पढने के बाद दाहिनी तरफ सलाम फेरे उसके तुरंत बाद दो सजदे करे और कायदा में बैठे और दुबारा हस्बे दस्तूर अत्ताहियात और दरूद ए इब्राहीम पढ़े और बाद में दुआ पढ़ कर दोनों तरफ सलाम फेर दे | 

मसला 

सजदा सहु के वक़्त अत्ताहियात के बाद अगर सलाम नहीं फेरा और सजदे में चला गया तो भी नमाज़ हो जाएगी मगर ऐसा करना मकरूह तहरिमी है ।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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