शाह-ए-दो आ'लम सलाम अस्सलाम
ग़रीबों के हमदम सलाम अस्सलाम
करो दूर हर ग़म सलाम अस्सलाम
हर आँख हो के पुर-नम सलाम अस्सलाम
शाह-ए-दो आ'लम सलाम अस्सलाम
ग़रीबों के हमदम सलाम अस्सलाम
रब ने बड़े प्यार से में'राज में कहा
रहने दो ना'लैन को आ जाओ मुस्तफ़ा
क़दम-ए-मुसतफ़ा का लिया अर्श ने बोसा
झूम उठे सारे मलाइक व मरहबा
मांगे जो नबी रब ने वो दिया
रब ने जो दिया नबी ने वो लिया
झुका अर्श-ए-आ'ज़म सलाम अस्सलाम
शाह-ए-दो आ'लम सलाम अस्सलाम
ग़रीबों के हमदम सलाम अस्सलाम
आपने जो कर दिया ऊँगली का इशारा
चाँद दो टुकड़े हुआ क़ुर्बान हो गया
जब नमाज़-ए-'अस्र 'अली की हुई क़ज़ा
आपने सूरज को दुबारा पलट दिया
आप जो किये, मो'जिज़े बने
आप जो चले , दो जहाँ जुके
मेरा सर भी ख़म सम सलाम अस्सलाम
शाहे दो आलम सलाम अस्सलाम
गरीबों के हमदम सलाम अस्सलाम
या नबी ! अब हिन्द में मुश्किल हुआ जीना
नज़रे करम से हमें बुलवाएं मदीना
पास हमारे न कोई मालो ज़र है
मुझसे बड़ी दूर मदीने का सफर है
देर न करो जल्दी बुलालो
दर पे बुला कर ग़म से छुड़ा लो
निकल जाए ना दम सलाम अस्सलाम
शाहे दो आलम सलाम अस्सलाम
गरीबों के हमदम सलाम अस्सलाम
या नबी ! अब हश्र में उम्मत को बचाना
आसियों को नूरी चादर में छुपाना
ज़िन्दगी हमारी गुनाहों में कटी है
या नबी ! बख्शीश ये नज़र सब की लगी है
शाहे अम्बिया ! देना सहारा
नूरे किब्रिया ! सुन लो ये सदा
करम जाने आलम सलाम अस्सलाम
शाहे दो आलम सलाम अस्सलाम
गरीबों के हमदम सलाम अस्सलाम
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