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तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ

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तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ

तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ 
मुझे बख्श दे खुदाया, मैं तौबा करता हूँ
 
तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ 
 
मेरे जुर्म की सियाही, कहीं कर न दे तबाही
मेरे हाल पर करम हो, मुझे भिक दो इलाही
मेरी मगफिरत हो मौला, मैं तौबा करता हूँ
 
तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ 
 
मैं फिरा हूँ मारा मारा, न मिला कोई सहारा
मेरा बेवफा जहां में, न हुआ कहीं गुज़ारा
तेरे दर पे लौट आया, मैं तौबा करता हूँ
 
तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ 
 
जो गुनाह करते करते, हुआ क़ब्र में अँधेरा
मेरा क्या बनेगा मौला, जो तेरा करम न होगा
तेरे खौफ ने रुलाया, मैं तौबा करता हूँ
 
तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ 
 
यूँहीं ईस्यां में उजागर, मैंने ज़िन्दगी बितादी
मैंने अपनी कुल कमाई, दोनों हाथों से लुटादी
मेरे हाथ कुछ न आया, मैं तौबा करता हूँ
 
तेरी बारगाह में मौला, मैं तौबा करता हूँ 
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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