भाषा:

खोजें

वही खुदा है हंद

  • यह साझा करें:
वही खुदा है हंद

कोई तो है जो निज़ाम-ए-हस्ती चला रहा है
वोही ख़ुदा  है 

दिखाई भी जो ना दे, नज़र भी जो आ रहा है
वोही ख़ुदा  है , वोही ख़ुदा  है

नज़र भी रक्खे समा'अतें भी
वो जान लेता है निय्यतें भी

जो खाना-ए-ला शऊर में जगमगा रहा है
वोही ख़ुदा  है , वोही ख़ुदा  है

तलाश उसको ना कर बुतों में
वो है बदलती हुई रुतों में

जो दिन को रात और रात को दिन बना रहा है
वोही ख़ुदा  है , वोही ख़ुदा  है
 
कोई तो है जो निज़ाम-ए-हस्ती चला रहा है
वोही ख़ुदा  है , वोही ख़ुदा  है

दिखाई भी जो ना दे, नज़र भी जो आ रहा है
वोही ख़ुदा  है , वोही ख़ुदा  है
 
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

एक टिप्पणी छोड़ें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy