आ गए आ गए आ गए, कमली वाले नबी आ गए – राहत फतेह अली ख़ान
कट गई शामे फुरक़त, सवेरा हुआ
देखो तशरीफ़ ले आए ख़ैरुल वरा
जिनके जलवों से चमकेगा ग़ारे हिरा
दो जहां मिल के पढ़ते हैं, सल्ले अला।
आ गए आ गए आ गए
आ गए आ गए आ गए, कमली वाले नबी आ गए
इनका आंगन सजे मुस्तफा के लिए
ये सआ़दत थी सिर्फ आमना के लिए
जो हैं दर्मां ग़म ए ला-दवा के लिए
आसियों, बेकसों पे अ़ता के लिए।
आ गए आ गए आ गए, कमली वाले नबी आ गए
आ गए आ गए…..
आ… आ…. गए
आ गए आ गए, कमली वाले नबी
आ गए आ गए, कमली वाले नबी
उठ के काबे से, ये रहमत की घटा कहती है
मुस्कुराती हुई वहदत की अदा कहती है
सब रसूलान आए सलामी के लिए
आमना बीबी के आंगन की सदा कहती है।
आ गए आ गए, कमली वाले नबी
आ गए आ गए, कमली वाले नबी
खज़ाने हक़ ने रहमत के लुटाए
मुबारक हो शहे कौनैन आए
सुकूने ज़िन्दगी इंसां ने पाए
बढ़े, कहते हुए रहमत के साए।
आ गए आ गए, कमली वाले नबी
आ गए आ गए, कमली वाले नबी
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