ख़ुशियाँ मनाओ, झंडे लगाओ, घर को सजाओ मिल के
अपने नबी की 'अज़मत के तुम गीत सुनाओ मिल के
चराग़ाँ ही चराग़ाँ हों, ख़ुशी के शादियाने हों
मेरे आक़ा की आमद है, सदाएँ मरहबा की हों
वाली-ए-मक्का, वाली-ए-तयबा और दुनिया के वाली
आमिना बी के घर आए हैं, महकी डाली डाली
हर जानिब ये धूम मची है
हर जानिब ये धूम मची है
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
मरहबा ! मरहबा !
बि-हम्दिल्लाह, 'अब्दुल्लाह का नूर-ए-नज़र आया
मुबारक, आमिना का नूर-ए-दिल लख़्त-ए-जिगर आया
ये 'अब्दुल-मुत्तलिब की ख़ूबी-ए-क़िस्मत कि इन के घर
चराग़-ए-ला-मकाँ, कौन-ओ-मकाँ का ताजवर आया
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
ख़ुशियाँ मनाओ, झंडे लगाओ, घर को सजाओ मिल के
अपने नबी की 'अज़मत के तुम गीत सुनाओ मिल के
चराग़ाँ ही चराग़ाँ हों, ख़ुशी के शादियाने हों
मेरे आक़ा की आमद है, सदाएँ मरहबा की हों
वो ख़त्मुल-अंबिया तशरीफ़ फ़रमा होने वाले हैं
नबी हर एक पहले से सुनाता ये ख़बर आया
रबी'-ए-पाक ! तुझ पर अहल-ए-सुन्नत क्यूँ न क़ुर्बा हों
कि तेरी बारहवीं तारीख़ वो जान-ए-क़मर आया
मरहबा ! मरहबा !
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
मरहबा ! मरहबा !
शब-ए-मीलाद-ए-अक़्दस थी मसर्रत ज़र्रे ज़र्रे को
मगर इब्लीस अपने साथियों में नौहा कर आया
ज़मीं बोली कि बुत-ख़ाने से पाक-ओ-साफ़ होती हूँ
निदा का'बे से उट्ठी अब मेरा मक़्सूद बर आया
मरहबा ! मरहबा !
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
ख़ुशियाँ मनाओ, झंडे लगाओ, घर को सजाओ मिल के
अपने नबी की 'अज़मत के तुम गीत सुनाओ मिल के
चराग़ाँ ही चराग़ाँ हों, ख़ुशी के शादियाने हों
मेरे आक़ा की आमद है, सदाएँ मरहबा की हों
चलो, ऐ मुफ़लिसो ! जो आज माँगोगे वो पाओगे
कि सदक़ा बाँटता अर्ज़-ओ-समा का ताजवर आया
जमील-ए-क़ादरी ! जब सब्ज़-गुंबद उन का देखूँगा
तो समझूँगा मेरी नख़्ल-ए-तमन्ना में समर आया
मरहबा ! मरहबा !
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
सच्चे की आमद ! मरहबा !
मरहबा ! मरहबा !
ना'त-ख़्वाँ:
हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
वाली-ए-मक्का, वाली-ए-तयबा और दुनिया के वाली
आमिना बी के घर आए हैं, महकी डाली डाली
हर जानिब ये धूम मची है
हर जानिब ये धूम मची है
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
ज़बाँ पर अश्रक़ल-बदरु 'अलैना की सदाएँ थीं
दिलों में मा द'आ लिल्लाहि दा'ई की दु'आएँ थीं
वो नन्हीं बच्चियाँ छतों पे चढ़ कर दफ़ बजाती थीं
रसूल-ए-पाक की जानिब इशारे कर के गाती थीं
कि हम हैं बच्चियाँ नज्जार के 'आली घराने की
ख़ुशी है आमिना के ला'ल के तशरीफ़ लाने की
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
रबी'-उल-अव्वल उम्मीदों की दुनिया साथ ले आया
दु'आओं की क़ुबूलियत को हाथों हाथ ले आया
ख़ुदा ने ना-ख़ुदाई की ख़ुद इंसानी सफ़ीने की
कि रहमत बन के छाई बारहवीं शब इस महीने की
अज़ल के रोज़ जिस की धूम थी वो आज की शब है
जो क़िस्मत के लिए मक़्सूम थी वो आज की शब है
जहाँ में जश्न-ए-सुब्ह-ए-'ईद का सामान होता था
उधर शैतान कितना अपनी नाकामी पे रोता था
ब-हर-सू नग़्मा-ए-सल्ले-'अला गूँजा फ़ज़ाओं में
ख़ुशी ने ज़िंदगी की रूह दौड़ा दी हवाओं में
फ़रिश्तों की सलामी देने वाली फ़ौज गाती थी
जनाब-ए-आमिना सुनती तो ये आवाज़ आती थी
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
मुबारक हो हबीब-ए-किब्रिया तशरीफ़ लाते हैं
मुबारक हो मुहम्मद मुस्तफ़ा तशरीफ़ लाते हैं
मुबारक मुर्सलीं के पेशवा तशरीफ़ लाते हैं
मुबारक हो कि ख़त्मुल-अंबिया तशरीफ़ लाते हैं
मुबारक हो शह-ए-हर-दो-सरा तशरीफ़ लाते हैं
मुबारक 'आसियों के आसरा तशरीफ़ लाते हैं
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
जो माँगोगे वो पाओगे, पूरी होगी आस
दूर हैं जितनी ख़ुशियाँ तुम से, आ जाएँगी पास
दो जग के मुख़्तार का ना'रा सारे लगाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
नबियों के सुल्तान हैं आक़ा, नबियों के सुल्तान
ख़लिश मुज़फ़्फ़र ! वो करते हैं हर मुश्किल आसान
अपने अपने मन की बिपता उन को सुनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
वाली-ए-मक्का, वाली-ए-तयबा और दुनिया के वाली
आमिना बी के घर आए हैं, महकी डाली डाली
हर जानिब ये धूम मची है
हर जानिब ये धूम मची है
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
आमिना बी के प्यारे का जश्न मनाओ मिल के
ना'त-ख़्वाँ:
हाजी मुश्ताक़ अत्तारी
सय्यिद रैहान क़ादरी
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