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आका लेलो सलाम अब हमारा

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आका लेलो सलाम अब हमारा

आका! लेलो सलाम अब हमारा

आका! लेलो सलाम अब हमारा
सबा! तू मदीने जाके कहना खुदारा

ग़म से हैं टूटे हुए, इसियाँ में डूबे हुए
कर दो करम या नबी! हैं हाथ फैले हुए
रोज़े महशर उम्मती का, आप ही सहारा

आका! लेलो सलाम अब हमारा
सबा! तू मदीने जाके कहना खुदारा

चाँद के टुकड़े हुए, पेड़ों ने सजदे किए
सूरज पलट आ गया, ये मो'ज़ज़े आपके
सारी दुनिया पर है आका! क़ब्ज़ा तुम्हारा

आका! लेलो सलाम अब हमारा
सबा! तू मदीने जाके कहना खुदारा

नूर-ए-ख़ुदा आप हैं, शह-ए-हुदा आप हैं
अय सरवर-ए-अंबिया! बहर-ए-सखा आप हैं
है ये 'अज़मत, रब ने तुम पर, क़ुरआन उतारा

आका! लेलो सलाम अब हमारा
सबा! तू मदीने जाके कहना खुदारा

दिन रात रोती है ये, उम्मत तुम्हारे लिए
हो जाए नज़र-ए-करम, आका! हमारे लिए
तैबा की गलियों का हमको, हो अब नज़ारा

आका! लेलो सलाम अब हमारा
सबा! तू मदीने जाके कहना खुदारा

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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