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अल्लाह तेरा है एहसान | नूरे रमज़ान

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अल्लाह तेरा है एहसान | नूरे रमज़ान

शुक्र-ए-ख़ुदा करो, माह-ए-रहमान आ गया

तक़सीम करने ने'मतें रमज़ान आ गया

अल्लाह तेरा है अहसान , रोज़े, नमाज़ें और क़ुरआन
हैं ये सब रूह-ए-ुमान , नूर-ए-रमज़ान 

नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 
नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 

'इल्म मशरूत है 'अमल से , और ये हासिल होता है जब कोशिश की जाए दिल से 

'इल्म-ओ-'अदब सिखलाएंगे , दीन-ए-ख़ुदा फैलाएंगे 
मस्जिद में भी जाएंगे , हम तो नात सुनाएंगे
अल्लाह तेरा है अहसान , तूने बड़ा दी सब की शान
आया है बन के मेहमान , नूर-ए-रमज़ान 

नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 
नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 

दीन-ए-इस्लाम , मोहब्बत का पयाम
अल्लाह का इन'आम , ख़ालिक़ का है पैग़ाम

कैसी हवा-ए-'इश्क़ चली , ख़त्म हुई नफरत दिल की
बाँट रहे हैं प्यार सभी , सहरी हो या इफ्तारी
अल्लाह तेरा है अहसान , एक हुए सारे इंसान
सज गए घर घर दस्तरख्वान, नूर-ए-रमज़ान 

नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 
नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 

मेरी ख़ातिर ख़ुदा , तूने क्या क्या किया
तूने ख़ुशियों से दामन मेरा भर दिया
और बदले में मैंने तुझे क्या दिया
इन गुनाहों पे दिल रो रहा है मेरा 

मैंने माँ-बाप का हक़ अदा ना किया
तेरे बंदों का दिल भी दुखाया बड़ा
ना ही ख़ैरात की ना ही सदक़ा किया
सिर्फ अपने ही बारे में सोचा किया 

ना नमाज़ें पड़ीं , ना ही रोज़ा रक्खा 
और 'इबादात का हक़ 'अदा ना किया
फिर भी तूने करम अपना जारी रक्खा
तू सख़ी है बड़ा मैं पशेमान हूँ 

रहम कर दे ख़ुदा , रहम कर दे ख़ुदा 

है ये बख्शीश का सामान , सजदे में है हर इंसान
क्या सज्जादर क्या फरहान , नूर-ए-रमज़ान 

नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 
नूर-ए-रमज़ान नूर-ए-रमज़ान 

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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