बड़े पीर बे-नज़ीर तुम पे दिल क़ुर्बान है,
महबूब-ए-सुबहान हो तुम ये मेरा ईमान है।
रौज़े पे चांदनी है जलवों के नूर की,
दुखियों के वास्ते है रहमत हुज़ुर की
,
जिलान वाले आका मेरा सलाम लो,
बगदाद वाले दूल्हा गिरतो को थाम लो,
ऐ सरकार शहर-ए-यार सदके तुमपे जान है,
महबूब-ए-सुबहान हो तुम ये मेरा ईमान है।
पाया है जीलां तुमने शाही घराना,
सारा जमाना है तुम्हारा दीवाना,
आता है जो भी दर-ए-अकदस पे दूर से,
जाता है ले के मुरादें वो हुज़ुर से,
तुम हो नूर ऐ हुज़ूर सबसे आला शान है,
महबूब-ए-सुबहान हो तुम ये मेरा ईमान है।
मेरी तलब तो प्यारे तेरा दीदार है,
बगदाद वाले ये दिल तुमपे निसार है,
हिज्र में तेरे मेरा दिल बे-क़रार है,
जलवा दिखा दो वरना जीना दुशवार है,
ऐ जिलां ऐ मीरा ये मेरा अरमान है,
महबूब-ए-सुबहान हो तुम ये मेरा ईमान है।
है मेरी आरज़ु मैं बगदाद आऊं,
बगदाद आके अपना दुखड़ा सुनाउं,
दुखड़ा सुना के तुमको अपना बनाऊं,
जी चाहता है तुमपे कुर्बान जाऊं,
गौस-ए-पाक मैं हूं खाक मेरी क्या पहचान है,
महबूब-ए-सुबहान हो तुम ये मेरा ईमान है।




