बड़ी दूर से आए हैं, मु'ईनुद्दीन सय्यिदा का सदक़ा दो
बड़ी दूर से आए हैं, मु'ईनुद्दीन सय्यिदा का सदक़ा दो
ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया
ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ हामी-ए-बे-कसाँ
इल्तिजा सुन लो शाह-ए-उमम के लिए
कर दो कर दो करम, मुर्शिद-ए-मोहतरम
तुम को भेजा गया है करम के लिए
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ हामी-ए-बे-कसाँ
इल्तिजा सुन लो शाह-ए-उमम के लिए
नूर-ए-शाह-ए-नजफ़ मेरे ख़्वाजा पिया
तेरी चौखट पे वलियों ने पहरा दिया
ख़ालिक़-ए-दो-जहाँ से ये रुत्बा मिला
तेरे दरबार-ए-फ़ैज़-ओ-करम के लिए
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ हामी-ए-बे-कसाँ
इल्तिजा सुन लो शाह-ए-उमम के लिए
शाह-ए-अजमेर मेरा मसीहा है तू
दर्द-मंदों के दुख का मदावा है तू
तेरी निस्बत का दामन रहे हाथ में
बस दवा है यही रंज-ओ-ग़म के लिए
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ हामी-ए-बे-कसाँ
इल्तिजा सुन लो शाह-ए-उमम के लिए
थामना हाथ, ऐ सय्यिद-ए-मेहरबाँ
है तेरा काम, ख़्वाजा ! ख़ता-पोशियाँ
लाज रखना फ़ना की, मु'ईन-ए-जहाँ
हश्र में, ताजदार-ए-हरम के लिए
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ हामी-ए-बे-कसाँ
इल्तिजा सुन लो शाह-ए-उमम के लिए
ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया
ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया ख़्वाजा पिया
बड़ी दूर से आए हैं, मु'ईनुद्दीन सय्यिदा का सदक़ा दो
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