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बेखुद की ये देते हैं अंदाज़ है जाबान

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बेखुद की ये देते हैं अंदाज़ है जाबान


बेखुद की ये देते हैं अंदाज़ है जाबाना,

आ दिल में तुझे रख लूं ऐ जलवए जानाना।


इतना तो करम करना ऐ चश्में करीमाना,

जब जान लबों पर हो तुम सामने आ जाना।


जी चाहता हूं तोहफे में भेझूं मैं उन्हें आखें,

दर्शन का तो दर्शन हो नज़राने का नज़राना।


मैं होशो हवास अपने इस बात पे खो बैठा,

हस कर जो कहा तुमने आया मेरा दीवाना।

 

दुनिया में मुझे तूने जब अपना बनाया है,

तो महशर में भी कह देना ये है मेरा दीवाना।


क्या लुत्फ हो महशर में सजदे में गिरूं उनके,

सरकार कहें देखो दीवाना है दीवाना।

 

क्यूं आंख मिलाई थी क्यूं आग लगाई थी,

अब रुख को छुपा बैठे कर के मुझे दीवाना।

 

पीने को तो पी लूंगा बस अर्ज़ ज़रा सी है,

अजमेर का साक़ी हो बग़दाद का मैखाना।

 

बेदम तेरी क़िस्मत में सजदे के उसी दर के,

छूटा है छूटेगा संगे दर ए जानाना।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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