छूटे न कभी तेरा दामन
या ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन,
है तुझ पे फिदा सब तन मन धन
या ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन ।।।
अजमेर मुझे पहुंचा दे खुदा
चादर मैं चढ़ाऊं फूलों की,
फिर सदका करूं अपना तन मन
या ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन।।।
काबा हो मदीना हो के नजफ
है जा पे नज़र तुम आते हो
कुछ ऐसी लगी है तुझ से लगन
या ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन।।।
आक़ा (ﷺ) की अता हो नूर ए अली,
ज़हरा की कली वालियों के वली,
हसनैन के दिल उस्मान के नयन
या ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन।।।
फरज़न्द अली हो नूर ए नबी (ﷺ)
महबूब ए खुदा है ज़ात तेरी
हो सय्यदा ज़हरा के गुलशन
या ख़्वाजा मुईनुद्दीन हसन।।।
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