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दंग हैं सब देख कर आधा इधर आधा उधर

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दंग हैं सब देख कर आधा इधर आधा उधर
दंग हैं सब देख कर आधा इधर आधा उधर
हो गया पल में कमर आधा इधर आधा उधर

चाँद ही क्या आसमां को भी गर कहते हुज़ूर
वो भी गिरता टूट कर आधा इधर आधा उधर

आला हज़रात के गुलामों से उलझना छोड़ दो
फ़ेंक देंगे काट कर आधा इधर आधा उधर

जब रज़ा की उठ गयी तलवार तो फिर क्या हुआ
हो गया नजदी का सर आधा इधर आधा उधर

इक तरफ मक्के की सरहद , इक तरफ शेहरे नबी
काश होता मेरा घर आधा इधर आधा उधर

दुश्मनाने मुस्तफा को देख लेना पुल सिरात
डाल देंगे काट कर आधा इधर आधा उधर
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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