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दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

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दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा
मदीने वाले कहें मकामी, हो उनके दर पर क़याम ऐसा
 
दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

बिलाल तुझपर निसार जाऊं, के खुद नबी ने तुजे ख़रीदा
नसीब हो तो नसीब ऐसा, गुलाम हो तो गुलाम ऐसा
 
दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

नमाज़ अक़्सा में जब पड़ाई, तो अम्बिया और रुसूल ये बोले
नमाज़ हो तो नमाज़ ऐसी, इमाम हो तो इमाम ऐसा
 
दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

लबों पे नाम-ए-नबी जब आया, गुरेज़-पा हादसों को पाया
जो टाल देता है मुश्किलों को, मेरे नबी का है नाम ऐसा

दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

हैं जितने अक़्ल-ओ-ख़िरद  के दावे, कब उनके गर्द-ए-सफर को पहुंचे
कोई भी अब तक समज न पाया, है मुस्तफा का मकाम ऐसा

दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

हुसैन क़ुरआन के है वो क़ारी, जो नोक-ए-नेज़ा पे भी ये बोले
सिवा ख़ुदा के न सर जुकाना, दिया जहां को पयाम ऐसा

दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

मुजी को देखो वो बे-तलब ही, नवाज़ते जा रहे हैं पैहम
न कोई मेरा 'अमल है ऐसा, न कोई मेरा है काम ऐसा

दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा

में खालिद अपने नबी पे क़ुर्बान, है जिनका ख़ुल्क़-ए-'अज़ीम क़ुरआन
है रौशनी जिसकी दो जहां में, यही है माह-ए-तमाम  ऐसा
 
दर-ए-नबी पर ये उम्र बीते, हो हमपे लुत्फ़-ए-दवाम ऐसा
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Mohammad Wasim

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