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दीवानों जुमते रहना

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दीवानों जुमते रहना

जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना

बहारों फूल बरसाओ, सितारों नूर बरसाओ
के रेहमत की गड़ी है बेक़रारों !

जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना

चलो महफ़िल सजाते हैं , चलो जांदे लगाते हैं
नबी के आशिकों गलियां सवारों

जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना


हर एक शय गुनगुनाती है , फ़ज़ा भी मुस्कुराती है
चरागाँ घर पे करते दीनदारों !

जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना

अये बीबी आमेना ! तुम को मुबारक आमदे आक़ा
ये कह कर विर्दे दिल से जांनिसारों !

जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना

सजा कर मस्जिदें अपनी ज़माने को बता डालो
ख़ुशी सरकार की है ताबेदारों !

जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना

गुलामे मुस्तफा हूँ में , शरफ मैंने ये पाया है
यही इनआम है अये ताबेदारों !

जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
जुमते रहना जुमते रहना जुमते रहना
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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