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फातिमा का लाडला, जो अली के घर पला | हुसैन इब्ने अली

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फातिमा का लाडला, जो अली के घर पला | हुसैन इब्ने अली

फातिमा का लाडला, जो अली के घर पला,
वो हुसैन इब्ने अली ।

पैकर ए सबरो रज़ा, बादशाहे करबला,
वो हुसैन इब्ने अली।

 


कौन है सरदारे जन्नत, किस के नाना हैं नबी (ﷺ),
की मां हैं फातिमा, भाई हसन बाबा अली,

लाए थे किस के लिए जिब्रील कपड़े जन्नती,
वो हुसैन इब्ने अली।

 

है मेरी आंखों की ठंडक, है मेरे इस दिल का चैन,
मैं हुसैन इब्ने अली से हुं तो मुझसे से है हुसैन,

ज़ालिमाें क्या भूल बैठे ये हदीस ए पाक भी,
वो हुसैन इब्ने अली।

 

सजदे को लंबा करे सरकार  (ﷺ) जिनके वास्ते,
जिनको कांधे पर बिठा कर तय कराए रास्ते,

चूमते रहते हों जिनको हर घड़ी प्यारे नबी  (ﷺ)
वो हुसैन इब्ने अली।

 

अपने नाना का मदीना मां की तुरबत छोड़ दी,
एक वादे के लिए जीने की चाहत छोड़ दी,

हश्र तक उनकी तरह आया ना आयेगा कोई,
वो हुसैन इब्ने अली।

 

जिनके बाज़ूओ की ताक़त हों अली शेर ए खुदा,
कर गई हो परवरिश जिनकी जनाब ए फातिमा,

कौन उनसे छीन पाए जुल्फीक़ारे हैदरी,
वो हुसैन इब्ने अली।

 

हँस के अकबर की जवानी को लुटा कर दीन पर,
कर के कुर्बां गोद में छह माह का नन्हा जिगर,

दीन ए पाक ए मुस्तफा (ﷺ) को दे रहें हैं ज़िंदगी,
वो हुसैन इब्ने अली।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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