फातिमा तेरी चादर का पुछना,
तेरी चादर का एहसान इस्लाम पर,
तेरी चादर के टुकड़े 72 हुए,
उन 72 का एहसान इस्लाम पर।
सैय्यदा तेरे बाबा हबीब-ए-खुदा (ﷺ),
तेरे शौहर हैं मौला अली मुर्तज़ा,
तेरे बच्चे शहीदान-ए-कर्बोबला,
तेरे घर भर का एहसान इस्लाम पर।
रन में ज़ैनब ने यूं हक अदा कर दिया,
यानी तामिल-ए-हुक्म-ए-खुदा कर दिया,
अपने बच्चों को दीं पर फिदा कर दिया,
ऐसी मादर का एहसान इस्लाम पर।
वक़्त आया तो आका ने सर दे दिया,
राह-ए-हक़ में नवासो का सर दे दिया,
एक जान ही नहीं घर घर दिया,
इब्न-ए-हैदर का एहसान इस्लाम पर।
ज़िक्र-ए-जांबाज़ तालिब करें क्या बयान,
लुट गए रण में जब सारे पीर-ओ-जवान,
हद तो ये एक तिशना लब, बे-जुबां,
नन्हे असगर का एहसान इस्लाम पर।
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