ग़रीब आयें हैं दर पर तेरे ग़रीब नवाज़,
करो गरीब नवाज़ी मेरे गरीब नवाज़।
तुम्हारे दर की करामत ये बारहां देखी,
ग़रीब आए हैं और हो गए ग़रीब नवाज़।
लगा के आस बड़ी दूर से मैं आया हूं,
मुसाफिरो पे करम किजिए ग़रीब नवाज़।
तुम्हारी ज़ात से मेरा बड़ा ताल्लुक है,
के मैं गरीब बड़ा तुम बड़े गरीब नवाज।
ना मुझ सा कोई गदा है ना तुम सा कोई करीम,
ना दर से उठुंगा बे-कुछ लिए ग़रीब नवाज़।
हुजूर अशरफ-ए-सिमना के नाम का सदका,
हमारी झोली को भर दिजिए ग़रीब नवाज़।
ज़माने भर से मुझे कर दिया गनी सय्यद,
मैं सदक़े जाऊं तेरी जोग के गरीब नवाज।
एक टिप्पणी छोड़ें
आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं




