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है हम्द तेरी हर एक लब पर

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है हम्द तेरी हर एक लब पर

है हम्द तेरी हर एक लब पर 
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
है ज़ात तेरी सबसे मुनव्वर
है वस्फ़ तेरा सबसे बुलन्दतर
सबका है मौला, सबसे है बरतर
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
है हम्द तेरी हर एक लब पर 
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
अये 'अर्श वाले ! अये फर्श वाले
जलवे हैं तेरे सबसे निराले
'आलम में रोशन तुजसे उजाले
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
है हम्द तेरी हर एक लब पर 
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
जिसको दिया है तूने दिया है
जिससे लिया है तूने लिया है
क़ब्ज़े में तेरे अख़्ज़-ओ- 'अता है
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
है हम्द तेरी हर एक लब पर 
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
तेरा ही चर्चा हर चार-सू है
हर शै में तेरी ही रंग-ओ-बू है
देखा जिधर में वहां तू ही तू है
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
है हम्द तेरी हर एक लब पर 
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
अये ज़ात-ए-वाहिद मा'बूद तू है
मक़सूद तू है मशहूद तू है
ज़रती को तेरे मक़सूद तू है
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
 
है हम्द तेरी हर एक लब पर 
अल्लाहु अकबर , अल्लाहु अकबर
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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