हुज़ूर ! दर्द के मारे सलाम कहते हैं
दिल-ओ-निगाह हमारे सलाम कहते हैं
शफ़ी'-ए-रोज़-ए-जज़ा तुम हो, या रसूलल्लाह !
गुनाहगार तुम्हारे सलाम कहते हैं
हम बेकसों का, शाह-ए-मदीना ! सलाम लो
आक़ा ! सलाम लो, शह-ए-बतहा ! सलाम लो
हम बेकसों का, शाह-ए-मदीना ! सलाम लो
वल्लाह ! सारे नबियों के सरताज हो तुम्ही
महबूब-ए-हक़ हो, साहिब-ए-मे'राज हो तुम्ही
प्यारे रसूल, 'अर्श के दूल्हा ! सलाम लो
हम बेकसों का, शाह-ए-मदीना ! सलाम लो
तुम से ही दीन मिल गया, ईमान मिल गया
रहमत मिली, करम मिला, क़ुरआन मिल गया
सब कुछ तुम्हीं से पाया है, दाता ! सलाम लो
हम बेकसों का, शाह-ए-मदीना ! सलाम लो
तुम बिन नहीं है कोई मददगार, या नबी !
तूफ़ान-ए-ग़म से कर दो हमें पार, या नबी !
मजबूर ग़मज़दों का ख़ुदा-रा सलाम लो
हम बेकसों का, शाह-ए-मदीना ! सलाम लो
ना'त-ख़्वाँ:
मजीद शोला क़व्वाल
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