हर दर्द से छुटकारा दिला दीजिये आक़ा !
मुझको भी मदीने में बुला लीजिये आक़ा !
वल्लाह 'उमर क़त्ल की निय्यत से चले थे
देखा तो कहा कलमा पढ़ा दीजिये आक़ा !
ये कहने लगे रोके नबी से 'अली मौला
डूबे हुए सूरज को फिर दीजिये आक़ा !
ये सांप ने रो कर के कहा ग़ार के अंदर
मुझको भी ज़रा चेहरा दिखा दीजिये आक़ा !
सरकार का दर देखा तो फिर मेरे रज़ा ने
ये 'अर्ज़ किया पर्दा उठा दीजिये आक़ा !
जो बुग्ज़ रक्खे ताज-ए-शरीयत से हमारे
उस शख्स को मिट्टी में मिला दीजिये आक़ा !
बग़दाद के जो कुत्ते हैं वो शेरों से भी बढ़ कर
उन कुत्तों का कुत्ता ही बना दीजिये आक़ा !
बदकार निकम्मा है अगर नूर 'अली तो
तैबा में बुला कर के सजा दीजिये आक़ा !
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