भाषा:

खोजें

हरा गुंबद जो देखोगे. ज़माना भूल जाओगे

  • यह साझा करें:
हरा गुंबद जो देखोगे. ज़माना भूल जाओगे

हरा गुंबद जो देखोगे. ज़माना भूल जाओगे.
अगर तयबा को जाओगे। तो आना भूल जाओगे |


न इतराओ ज़ियादा. चाँद-तारो अपनी रंगत पर.
मेरे आक़ा को देखोगे. चमकना भूल जाओगे |


अगर तुम गोर से मेरे नबी की नात सुन लोगे.
मेरा दावा है तुम. गाना बजाना भूल जाओगे |


तुम्हारे सामने होगा कभी जब गुंबद-ए-ख़ज़रा.
नज़र जम जाएगी उस पर. हटाना भूल जाओगे |


हदीस-ए-मुस्तफ़ा पर तुम जो हो जाओ. अमल पैरा.
क़सम अल्लाह की. माँ को सताना भूल जाओगे |


नबी के पाक जल्वे को अगर तुम ख़्वाब में देखो.
क़सम रब की. चराग़ों को जलाना भूल जाओगे |


कभी पहली नज़र जब गुंबद-ए-ख़ज़रा पे जाएगी.
वो लम्हें तुम ज़माने को बताना भूल जाओगे |

टैग:
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

एक टिप्पणी छोड़ें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy