हरा गुंबद जो देखोगे. ज़माना भूल जाओगे.
अगर तयबा को जाओगे। तो आना भूल जाओगे |
न इतराओ ज़ियादा. चाँद-तारो अपनी रंगत पर.
मेरे आक़ा को देखोगे. चमकना भूल जाओगे |
अगर तुम गोर से मेरे नबी की नात सुन लोगे.
मेरा दावा है तुम. गाना बजाना भूल जाओगे |
तुम्हारे सामने होगा कभी जब गुंबद-ए-ख़ज़रा.
नज़र जम जाएगी उस पर. हटाना भूल जाओगे |
हदीस-ए-मुस्तफ़ा पर तुम जो हो जाओ. अमल पैरा.
क़सम अल्लाह की. माँ को सताना भूल जाओगे |
नबी के पाक जल्वे को अगर तुम ख़्वाब में देखो.
क़सम रब की. चराग़ों को जलाना भूल जाओगे |
कभी पहली नज़र जब गुंबद-ए-ख़ज़रा पे जाएगी.
वो लम्हें तुम ज़माने को बताना भूल जाओगे |
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