हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए
सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए
मैं सिर्फ़ देख लूँ एक बार सुबह तयबा को
क़ज़ा से फिर मेरी दुनिया में शाम हो जाए
हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए
सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए
तजल्लियात से भर लूँ मैं कासा-ए-दिल-ओ-जाँ
कभी जो उन की गली में क़याम हो जाए
हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए
सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए
हुज़ूर आप जो सुन लें तो बात बन जाए
हुज़ूर आप जो कह दें तो काम हो जाए
हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए
सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए
नसीब वालों में मेरा भी नाम हो जाए
जो ज़िन्दगी की मदीने में शाम हो जाए
हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए
सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए
हुज़ूर आप जो चाहें तो कुछ नहीं मुश्किल
सिमट के फासला ये चंद गाम हो जाए
हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए
सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए
मज़ा तो जब है फ़रिश्ते ये क़ब्र में कह दें
सबीह! मिदहत-ए-ख़ैरुल-अनाम हो जाए
हुज़ूर ऐसा कोई इंतिज़ाम हो जाए
सलाम के लिए हाज़िर ग़ुलाम हो जाए
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