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हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है

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हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है

हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है

हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है
मैं बे-करार था मेरा करार आपसे है 

हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है

मेरी तो हस्ती ही क्या है मेरे ग़रीब-नवाज़ !
जो मिल रहा है मुझे सारा तो प्यार आप से है 

मैं बे-करार था मेरा करार आपसे है

कहाँ ये अर्ज़-ए-मदीना , कहाँ मेरी हस्ती
ये हाज़री का सबब बार-बार आप से है 

मैं बे-करार था मेरा करार आपसे है
हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है

गुनाहगार हूँ आक़ा ! बड़ी नदामत है
क़सम ख़ुदा की ये मेरा वक़ार आप से है 

मैं बे-करार था मेरा करार आपसे है
हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है

मोहब्बतों का सिला कौन ऐसा देता है
सुनहरी जालियों में यार-ए-ग़ार आपसे है 

मैं बे-करार था मेरा करार आपसे है
हुज़ूर मेरी तो सारी बहार आप से है

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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