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इसलिए तो जाते हैं, उम्मति मदीने में

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इसलिए तो जाते हैं, उम्मति मदीने में
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
अपने घर की चौखट को , फिर न मुड़ के देखूंगा
मुस्तफा अता कर दें , झोपड़ी मदीने में
 
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
आप अगर बुला लेंगे , या नबी ! मदीने में
उम्र भर करूँगा मैं , नौकरी मदीने में
 
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
मैं नबी का आशिक़ हूँ , मार भी अगर दोगे
रूह मेरी चुपके से , जाएगी मदीने में
 
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
मैं बुहारूं पलकों से , मुस्तफा की चौखट को
काश मुझको मिल जाए , नौकरी मदीने में
 
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
कौन है ये दीवाना , किसका है ये दीवाना
जन्नत में भी कहता है , जाना है मदीने में
 
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
कौन है तेरा रहबर , पूछा तो खिज़र बोले
काली कमली वाले हैं , रहते हैं मदीने में
 
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
काश उनके कूचे से , अये सबा ! ले आ पैगाम
चल तुजे बुलाते हैं , मुस्तफा मदीने में 
 
इसलिए तो जाते हैं , उम्मती मदीने में
मुस्तफा बनाते हैं , जन्नती मदीने में
 
बा'द मेरे मरने के , हर जुबां पे चर्चा था
आदमी वो अच्छा था , मर गया मदीने में 
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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