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जबीन इज के सजदे लुटा कर उनके कूचे में

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जबीन इज के सजदे लुटा कर उनके कूचे में
 
जबीने इज्ज़ के सजदे लुटा कर उनके कूचे में
मुक़द्दर अपना चमकाएंगे जा कर उनके कूचे में

किसी सूरत हमारा अब यहां जी नहीं लगता
हमें बादे सबा ले जा उड़ा कर उनके कूचे में

कभी हम गुम्बदे ख़ज़रा को देखेंगे कभी खुद को
निगाहें बार बार अपनी उठा कर उनके कूचे में

उन्हें हम दिल ही दिल हाले दिल अपना सनाएँगे
ज़माने की निगाहों से छुपा कर उनके कूचे में

है तू भी अंदलीबे गुल्सिताने मुस्तफा नय्यर
सुना नग्में मुहम्मद के तू जा कर उनके कूचे में
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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