जिस के घर का है सारा ज़माना ग़ुलाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
सोच की हद से आगे है जिस का मक़ाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जिस के घर का है सारा ज़माना ग़ुलाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जिस का नाना रसूलों का सुल्तान है
जिस का बाबा 'अली कुल्ल-ए-ईमान है
सारी फ़िरदौस है जिस के बच्चों के नाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जिस के घर का है सारा ज़माना ग़ुलाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
ज़िक्र जिस का मुक़द्दस बहारों में है
नूर जिस की नज़र का सितारों में है
चाँद करता है जिस की गली में क़याम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जिस के घर का है सारा ज़माना ग़ुलाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जिस के दुख में है शामिल ज़मीन-ओ-ज़माँ
याद में जिस की रोता है सारा जहाँ
ज़िक्र करते हैं जिस का गदा सुब्ह-ओ-शाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जिस के घर का है सारा ज़माना ग़ुलाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जो शहीदों का सय्यद है, सरदार है
क़ाफ़िला-ए-शुजा'अत का सालार है
जो है, फ़ारूक़ी ! सब मोमिनों का इमाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
जिस के घर का है सारा ज़माना ग़ुलाम
उस हुसैन इब्न-ए-हैदर पे लाखों सलाम
शायर:
सुहैल कलीम फ़ारूक़ी
नात-ख़्वाँ:
उमैर ज़ुबैर क़ादरी
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