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जिन की तारीफ खुद रब्बे काबा करे

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जिन की तारीफ खुद रब्बे काबा करे

जिनकी तारीफ खुद रब्ब-ए-का'बा कर

जिनकी तारीफ खुद रब्ब-ए-का'बा करे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है
जिनको क़ुरआन यासीन-ओ-ताहा कहे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है

चाँद से खूब-तर है रुख-ए-मुस्तफा
उनको देखा तो ये आयशा ने कहा
तौबा-तौबा उन्हें चाँद जैसा कहूं
चाँद जैसा बताना गलत बात है

जिनकी तारीफ खुद रब्ब-ए-का'बा करे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है
जिनको क़ुरआन यासीन-ओ-ताहा कहे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है

लाये तशरीफ़ दुनिया में ख़ैर-उल-वरा
हक़्क़-ओ-बातिल हुआ आमने-सामने
कुफ्र अब शर्म से मुंह छुपाने लगे
आये जब मुस्तफा आमने-सामने

ये नबी ने कहा के इता'अत करो
अपने मां-बाप की खूब खिदमत करो
तेरे माँ-बाप का तुझपे अहसान है
उनके दिल को दुखाना गलत बात है

जिनकी तारीफ खुद रब्ब-ए-का'बा करे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है
जिनको क़ुरआन यासीन-ओ-ताहा कहे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है

गुमशुदा एक सुई का है वाक़िआ
जाने कब तक उसे ढूंढती आइशा
रात की तीरगी में उजाला लिए
आ गए मुस्तफा आमने-सामने

आइशा शायरा हैं अदीबा भी हैं
मोमीना हैं नबी की हुमैरा भी हैं
ताहिरा हैं नबी की वो ज़ौजा भी हैं
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है

जिनकी तारीफ खुद रब्ब-ए-का'बा करे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है
जिनको क़ुरआन यासीन-ओ-ताहा कहे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है

आओ बातिन चलो महकशी के लिए
महकदा है नबी का सभी के लिए
'इश्क़-ए-सरकार से जाम खाली है गर
फिरतो पीना पिलाना गलत बात है

जिनकी तारीफ खुद रब्ब-ए-का'बा करे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है
जिनको क़ुरआन यासीन-ओ-ताहा कहे
उनपे ऊँगली उठाना गलत बात है

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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