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जो हो चूका है, जो होगा हुजूर जानते हैं

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जो हो चूका है, जो होगा हुजूर जानते हैं
जो हो चूका है जो होगा हुज़ूर जानते हैं
तेरी आता से खुदाया ! हुज़ूर जानते हैं

खबर भी है के खबर सबकी है उन्हें कबसे
के जब ना अब था ना कब था हुज़ूर जानते हैं

अये इल्मे गैब के मुनकिर खुदा को देखा है
तुजे भी कहना पड़ेगा हुज़ूर जानते हैं

खुदा को देखा नहीं और एक मान लिया
जानते थे सहाबा हुज़ूर जानते हैं

वह्हाबियों का अक़ीदा वो गैब दान नहीं
सहबियों का अक़ीदा हुज़ूर जानते हैं

है उनके हाथ में क्या क्या तुजे खबर ना मुझे
खुदा ने कितना नवाज़ा हुज़ूर जानते हैं

हिरन ये कहने लगी छोड़ दे मुझे सय्याह
में लौट आउंगी वल्लाह हुज़ूर जानते हैं

बुला रहे हैं नबी जाके इतना बोल उसे
दरख़्त कैसे चलेगा हुज़ूर जानते हैं

कहाँ मरेंगे अब जहल उतबा ओ शैबा
के जंगे बद्र का नक़्शा हुज़ूर जानते हैं

नहीं है ज़ादे सफर पास जिन गुलामों के
उन्हें भी दर पे बुलाना हुज़ूर जानते हैं

में चुप खड़ा हूँ मुवाजा पे सर झुकाए हुए
सुनाऊँ कैसे फ़साना हुज़ूर जानते हैं

लबों को बखिया किया और दिल को समझाया
ज़रा संभल के धड़कना हुज़ूर जानते हैं

छुपा रहे हैं लगातार मेरे ऐबों को
में किस क़दर हूँ कमीना हुज़ूर जानते हैं

खुदा ही जाने उबेद उनको है पता क्या क्या
हमें पता है बस इतना हुज़ूर जानते हैं
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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