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काबे के बदरुद्दुजा तुमपे करोदो दुरूद

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काबे के बदरुद्दुजा तुमपे करोदो दुरूद

का'बे के बदरुद्दुजा ! तुमपे करोड़ों दुरूद
तयबाह के शम्सुद्दोहा ! तुमपे करोड़ों दुरूद
 
शाफ़ा-ए-रोज़-ए-जज़ा ! तुमपे करोड़ों दुरूद
दाफ़े'-ए-जुमला बला ! तुमपे करोड़ों दुरूद
 
और कोई ग़ैब क्या, तुमसे निहाँ हो भला 
जब ख़ुदा ही ना छुपा, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
दिल करो ठंडा मेरा, वो कफ-ए-पा चाँद सा
सीने पे रख दो ज़रा, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
ज़ात हुई इंतेखाब, वस्फ़ हुए ला-जवाब
नाम हुआ मुस्तफा, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
वो शब्-ए-में'राज राज, वो सफ-ए-महशर का ताज
कोई भी ऐसा हुआ, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
तुमसे जहां का निज़ाम, तुमपे करोड़ों सलाम
तुमपे करोड़ों सलाम, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
ख़ल्क़ के हाकिम हो तुम, रिज़्क़ के क़ासिम हो तुम
जो मिला तुमसे मिला, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
एक तरफ आदा-ए-दीं , एक तरफ हासिदीन
बंदा है तन्हा शहा ,तुमपे करोड़ों दुरूद
 
क्युँ कहूं बेकस हूँ मैं, क्युँ कहूं बेबस हूँ मैं
तुम हो मैं तुमपर फ़िदा , तुमपे करोड़ों दुरूद
 
अपने ख़तावारों को अपने ही दामन में लो
कौन करे ये भला , तुमपे करोड़ों दुरूद
 
करके तुम्हारे गुनाह, मांगें तुम्हारी पनाह
तुम कहो दामन में आ, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
हमने खता में न की, तुमने 'अता में न की
कोई कमी सरवरा, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
आँख 'अता कीजिये, उसमें ज़िया दीजिये
जलवा क़रीब आ गया, तुमपे करोड़ों दुरूद
 
काम वो ले लीजिये, तुमको जो राज़ी करे
ठीक हो नाम-ए-रज़ा, तुमपे करोड़ों दुरूद
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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