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कहती है ये फूलों की रिदा अल्लाहु अल्लाह

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कहती है ये फूलों की रिदा अल्लाहु अल्लाह
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !

कहती है ये फूलों की रिदा, अल्लाहु अल्लाह
अश्जार के पत्तों ने कहा, अल्लाहु अल्लाह

अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !

बादल ने आसमाँ पे लिखा अल्लाहु अल्लाह
पर्बत की क़तारों की निदा अल्लाहु अल्लाह

अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !

हो सूरा-ए-यासीन कि हो सूरा-ए-रहमान
क़ुरआन के लफ़्ज़ों की सदा अल्लाहु अल्लाह

अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !

करता है सना तेरी बरसता हुआ पानी
दरिया भी है मसरूफ़-ए-सना, अल्लाहु अल्लाह

अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !

ख़ुशबू, किरन, उजाले, धनक और कहकशाँ
ज़ाकिर हैं तेरे अर्ज़-ओ-समा, अल्लाहु अल्लाह

अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !

शबनम गिरी जो फूलों पे पढ़ती हुई सना
बुलबुल ने देख कर ये कहा, अल्लाहु अल्लाह

अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !

जब नज़'अ के 'आलम में हो, मौला ! ये उजागर
विर्द-ए-ज़बाँ हो ज़िक्र तेरा, अल्लाहु अल्लाह

अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !
अल्लाहु अल्लाह ! अल्लाहु अल्लाह !


शायर:
अल्लामा निसार अली उजागर

नात-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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