शाह-ए-बरेली अहमद रज़ा !
शाह-ए-बरेली अहमद रज़ा !
मेरी पहचान, अहमद रज़ा ख़ान
कौन है अहमद रज़ा ख़ाँ, मुझे मा'लूम न था
मेरे मुर्शिद ने बताया, मुझे मा'लूम न था
कौन है अहमद रज़ा ख़ाँ, मुझे मा'लूम न था
ना'तें बचपन से सुनी जिस में रज़ा आता था
आ'ला हज़रत का इसम था, मुझे मा'लूम न था
कौन है अहमद रज़ा ख़ाँ, मुझे मा'लूम न था
कंज़ुल-ईमाँ की ज़ियारत मुझे बचपन से हुई
आ'ला हज़रत ने लिखा था, मुझे मा'लूम न था
कौन है अहमद रज़ा ख़ाँ, मुझे मा'लूम न था
मेरा ईमान बचा ख़ैर से फ़ैज़ान-ए-रज़ा
कौन अपना है पराया, मुझे मा'लूम न था
कौन है अहमद रज़ा ख़ाँ, मुझे मा'लूम न था
साल चौदह को भी न पहुँचे, सँभाला इफ़्ता
पहला फ़तवा था रज़ा का, मुझे मा'लूम न था
कौन है अहमद रज़ा ख़ाँ, मुझे मा'लूम न था
शहरयार ! अपना इरादा था लिखूँ शान-ए-रज़ा
शान-ए-मुर्शिद के बयाँ का, मुझे मा'लूम न था
शायर:
सय्यिद शहरयार अत्तारी मदनी
ना'त-ख़्वाँ:
हाफ़िज़ ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी
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