कर्बला के जाँ-निसारों को सलाम
फ़ातिमा ज़हरा के प्यारों को सलाम
मुस्तफ़ा के माह-पारों को सलाम
नौजवानों गुल-'इज़ारों को सलाम
कर्बला तेरी बहारों को सलाम
जाँ-निसारी के नज़ारों को सलाम
या हुसैन इब्न-ए-'अली ! मुश्किल-कुशा !
आप के सब जाँ-निसारों को सलाम
अकबर-ओ-असग़र पे जाँ क़ुर्बान हो
मेरे दिल के ताजदारों को सलाम
क़ासिम-ओ-'अब्बास पर हों रहमतें
कर्बला के शह-सुवारों को सलाम
जिस किसी ने कर्बला में जान दी
उन सभी ईमानदारों को सलाम
भूकी प्यासी बीबियों पर रहमतें
भूके प्यासे गुल-'इज़ारों को सलाम
भेद क्या जाने शहादत का कोई
उन ख़ुदा के राज़दारों को सलाम
बे-बसी में भी हया बाक़ी रही
सब हुसैनी पर्दा-दारों को सलाम
रहमतें हों हर सहाबी पर मुदाम
और ख़ुसूसन चार यारों को सलाम
बीबियों को, 'आबिद-ए-बीमार को
बे-कसों को, ग़म के मारों को सलाम
हो गए क़ुर्बां मुहम्मद और 'औन
सय्यिदा ज़ैनब के प्यारों को सलाम
जो हुसैनी क़ाफ़िले में थे शरीक
कहता है 'अत्तार सारों को सलाम
शायर:
मुहम्मद इल्यास अत्तार क़ादरी
नात-ख़्वाँ:
मुहम्मद ओवैस रज़ा क़ादरी
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