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करते हैं जिन्नो बशर हर वक्त चर्चा गौस का,

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करते हैं जिन्नो बशर हर वक्त चर्चा गौस का,

करते हैं जिन्नो बशर हर वक्त चर्चा गौस का,
बज रहा है चार सू आलम में डंका गौस का ।


नार ए दोजख से बचाएगा का सहारा गौस का,
ले चलेगा खुल्द में अदना इशारा गौस का ।


नज़आ में, मरकद में, महशर में मदद फरमाएंगे,
हो चुका है अहद पहले ही हमारा गौस का ।


खालिक ए कौनो मकां ने पहले ही रोज़ ए अज़ल,
लिख दिया है मेरी पेशानी पे बंदा गौस का ।


क्या अजब बे–पूछ मुझ से छोड़ से मुनकर नकीर,
देख कर मेरे कफन पर नाम लिखा गौस का ।


नज़आ में, मरकद में, महशर में कहीं भी या खुदा,
हाथ से छूटे ना दामान ए मोअल्ला गौस का ।


हां ज़रा ठहरो फरिश्तों फिर जो चाहो पूछना,
कर तो लेने दो मुझे पहले नज़ारा गौस का ।


सब खसो खाशाक ए इस्यां आन में बह जाएगा,
जोश पर जाएगा जिस वक्त दरिया गौस का ।


झोलियां फैलाओ दौड़ो भीख लो दामन भरो,
बट रहा है आस्तां पर आमबाड़ा गौस का ।


आंख मलने के लिए हाथ आये चौखट गौस की,
सर रगड़ने के लिए मिल जाए रौज़ा गौस का ।


सजदा गाह ए जिन्नो इंसां आपका नक्शे कदम,
ताज वालों के लिए है ताज तलवा गौस का ।


रौशनी शमआ से क्या काम अंधे आंख को,
मोमिनों के चश्मे दिल में है उजाला गौस का ।


सल्तनत शाह ए मदीना ने अता फरमाई है,
राएज इक्लामे विलादात में है सिक्का गौस का ।                  


जलते है दुश्मन खुदा के उनके ज़िक्रो फ़िक्र से,
विर्द सब अल्लाह वाले करते हैं या गौस का ।


कर रहे हैं अश्कियां कोशिश घटाने की मगर,
रोज़ अफ्ज़ों हो रहा है बोल बाला गौस का ।


नक्शे पा शाह ए मदीना साफ आता है नजर,
जब तसव्वुर में जमाते हैं सरापा नूर का ।


सदके इस बंदा नवाज़ी के फिदा उस दैन के,
हम से कुत्ते पल रहे हैं खा के टुकड़ा गौस का ।


हश्र में उठ्ठा हुआ है है रु ए अनवर से नक़ाब,
आशिकों दिल खोल के कर लो नज़ारा गौस का ।


उम्र भर रखना जमील ए कादरी वीर्द ए ज़बां,
नाम ए हक़ का और हबीब ए किब्रिया का गौस का ।


गौस को क्यू कर न आए प्यार तुमपे ऐ जमील,
है रज़ा मुर्शीद तुम्हारा जो है प्यारा गौस का ।।

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Mohammad Wasim

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