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काश गुंबदे खजरा देखने को मिल जाता

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काश गुंबदे खजरा देखने को मिल जाता
दाग-ए-फुरकत-ए-तैबा , क़ल्ब-ए-मुज़महिल जाता
काश गुम्बद-ए-ख़ज़रा , देखने को मिल जाता
 
दम मेरा निकल जाता , उनके आस्ताने पर
उनके आस्ताने की , ख़ाक में , मैं मिल जाता
 
काश गुम्बद-ए-ख़ज़रा , देखने को मिल जाता
 
मौत ले-के आ-जाती ज़िन्दगी मदीने में
मौत से गले मिल कर , ज़िन्दगी में मिल जाता
 
काश गुम्बद-ए-ख़ज़रा , देखने को मिल जाता
 
दिल पे जब किरन पड़ती , उनके सब्ज़ गुम्बद की
उसकी सब्ज़ रंगत से , बाग़ बन के खिल जाता
 
काश गुम्बद-ए-ख़ज़रा , देखने को मिल जाता
 
वो खीराम फरमाते , मेरे दीदा-ओ-दिल पर
दीदा मैं फ़िदा करता , सदक़े मेरा दिल जाता
 
काश गुम्बद-ए-ख़ज़रा , देखने को मिल जाता
 
उनके दर पे अख्तर की , हसरतें हुई पूरी
साईल-ए-दर-ए-अक़दस , कैसे मुंफ'इल
 
काश गुम्बद-ए-ख़ज़रा , देखने को मिल जाता
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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