ख़ैरात लेने आ गए मँगते तुम्हारे, ख़्वाजा !
भर दीजिए दामन मुरादों से हमारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मँगतों की रख ले लाज, कर दे सब मुरादें पूरी
दामन पसारे आ गए तेरे दुवारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मायूस जाता ही नहीं कोई तुम्हारे दर से
हम को भी दे हसनैन के सर के उतारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
तू ने मदद की, हाँ ! मदद की, हाँ ! मदद की तू ने
क़ुर्बां तेरे, जब भी तड़प कर हम पुकारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
अजमेर का दरबार दिखला, कि सुनाऊँ आ कर
रो रो के हाल-ए-दिल मेरा तेरे दुवारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
देता हूँ तुझ को वास्ता ग़ौस-उल-वरा का, मुझ को
फिर मस्जिद-ए-नबवी के दिखला दे मिनारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
ये जगमगाता, नूर बरसाता तुम्हारा रौज़ा
शर्मा गए हैं इस के आगे चाँद-तारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
हसरत 'उबैद-ए-क़ादरी को दीद की है, मुर्शिद !
लिल्लाह, निक़ाब-ए-रुख़ उठा दे प्यारे प्यारे, ख़्वाजा !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
मेरे ख़्वाजा पिया ! मेरे ख़्वाजा पिया !
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