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खिला मेरे दिल की कली ग़ौस ए आज़म

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खिला मेरे दिल की कली ग़ौस ए आज़म

खिला मेरे दिल की कली गौस-ए-'आज़म

खिला मेरे दिल की कली गौस-ए-'आज़म
मिटा क़ल्ब की बेकली गौस-ए-'आज़म
 
मेरे चाँद में सदके आजा इधर भी
चमक उट्ठे दिल की कली गौस-ए-'आज़म
 
तेरे रब्ब ने मालिक किया तेरे जद्द को 
तेरे दर से दुनिया पली गौस-ए-'आज़म
 
हमारा भी बेडा लगादो किनारे
तुम्हें ना-ख़ुदाई मिली गौस-ए-'आज़म
 
फ़िदा तुमपे हो जाए नूरी ये मुज़्तर
ये है इसकी ख्वाहिश-ए-दिली गौस-ए-'आज़म
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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