क्या करूँ के याद आती हैं सुनहरी जालियां
दिल में एक हलचल मचाती हैं सुनहरी जालियां
अपनी पलकों से उन्हें मैं चूमता हूँ देर तक
दिल में जब भी जगमगाती हैं सुनहरी जालियां
फूटने लगती हैं फिर उम्मीद की किरणें नयी
ख़्वाब आँखों में जगाती हैं सुनहरी जालियां
ज़िन्दगी भर की थकन को दूर कर देती है वो
प्यार से जब मुस्कुराती हैं सुनहरी जालियां
पूछने वाले ! मैं लब्ज़ों में बयान कैसे करूँ
क्या बताऊँ क्या दिखाती हैं सुनहरी जालियां
जो यहाँ पहुंचा वो आक़ा की शफा'अत पा गया
राह जन्नत की दिखाती हैं सुनहरी जालियां
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