लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
मज़लूम की कुछ दाद-रसी लाज़मी कर ले
कुछ जज़्बा-ए-ईमान बढ़ा, ज़ौक़-ए-ख़िज़र ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
अय्यूबी का बेटा हूँ मैं दुनिया को बता दे
सैहूनि शर-अंगेज़ों की फिर ख़ूब ख़बर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
जा देख फ़लस्तीं के ख़ूँ-आलूद बदन को
मत आँख चुरा इस से तू मत राह-ए-मफ़र ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
दिल चीर के रख देंगे तेरा अक़्सा के आँसू
गर दर्द-ए-दिल-ए-उम्मत-ए-बैज़ा का असर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
अल-वद'उ ग़रीब उन्ज़ुर अख़ी उन्ज़ुर इल-र्रब
तू बहनों की चीख़ों पे ज़रा कान तो धर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
होंटों पे सजा ना'रा-ए-तकबीर, ऐ शाहीं !
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
उठ बाँध कमर मर्द-ए-मुजाहिद का जिगर ले
मोमिन है तो फिर मस्जिद-ए-अक़्सा की ख़बर ले
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
लब्बैक लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
लब्बैक लब्बैक, या अक़्सा !
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