ह़क़ बात कहो और डट जाओ
चाहें गर्दन भी कट जाये
जब खून बहे दुश्मन भी कहे
ग़ैरत मुस्लिम जिंदा है
मायूस नहीं है हम अल्लाह की रह़मत से
हक़ बात कही है तो हम डट के दिखाएंगे
आक़ा की मोहब्बत को हर दिल में जगायेंगे
यूं उनके दुश्मन को दुनिया में जलायेंगे
मायूस नहीं है हम अल्लाह की रह़मत से
हक़ बात कही है तो हम डट के दिखाएंगे
आक़ा का जो दुश्मन है दुश्मन है ज़माने का
हम ऐसे फितने को दुनिया से मिटायेंगे
मायूस नहीं है हम अल्लाह की रह़मत से
हक़ बात कही है तो हम डट के दिखाएंगे
बस राह ए सहाबा में पुख़्ता हों क़दम अपने
फिर इश्क़े नबी में हम मंज़िल तक जायेंगे
मायूस नहीं है हम अल्लाह की रह़मत से
हक़ बात कही है तो हम डट के दिखाएंगे
गर इश्क़े नबी में फिर पा ली ये शहादत तो
है पुख़्ता यकीं हमको जन्नत को पायेंगे
मायूस नहीं है हम अल्लाह की रह़मत से
हक़ बात कही है तो हम डट के दिखाएंगे
आक़ा के दीवानों के सागर हैं दीवाने हम
हम उनकी अज़मत को सीने से लगायेंगे
मायूस नहीं है हम अल्लाह की रह़मत से
हक़ बात कही है तो हम डट के दिखाएंगे
आक़ा की मोहब्बत को हर दिल में जगायेंगे
यूं उनके दुश्मन को दुनिया में जलायेंगे
मायूस नहीं है हम अल्लाह की रह़मत से
हक़ बात कही है तो हम डट के दिखाएंगे
एक टिप्पणी छोड़ें
आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं




