सल्लल्लाहु 'अला मुहम्मद
सल्लल्लाहु 'अलैहि व सल्लम
करम के बादल बरस रहे हैं, दिलों की खेती हरी-भरी है
ये कौन आया कि ज़िक्र जिस का, नगर नगर है, गली गली है
ये कौन बन कर क़रार आया, ये कौन जान-ए-बहार आया
गुलों के चेहरे हैं निखरे निखरे, कली कली में शगुफ़्तगी है
दिये दिलों के जलाए रखना, नबी की महफ़िल सजाए रखना
जो राहत-ए-दिल, सुकून-ए-जाँ है, वो ज़िक्र ज़िक्र-ए-मुहम्मदी है
कैसी रौनक़, कैसा मंज़र, कैसा मौसम देखा
आमिना का चाँद चमका, देखो नूर फैला
गली गली मुहल्ले में मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
ख़ुशियाँ मनाओ सारे, झंडे लगाओ सारे
घर को सजाओ सारे बर्क़ी कुमकुमों से
आज हमारे आँगन में महफ़िल-ए-मीलाद सजी
प्यारे नबी का नाम लिया, प्यारे नबी की बात हुई
ना'तों के नज़राने हैं, 'इश्क़-ए-नबी के ना'रे हैं
जो भी 'अक़ीदत से आया, उस मँगते की बात बनी
गली गली मुहल्ले में मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
ईमान हमारा ! मीलाद !
दिल-जान से प्यारा ! मीलाद !
है नूर की बारिश ! मीलाद !
मोमिन की ख़्वाहिश ! मीलाद !
है मेरी मोहब्बत ! मीलाद !
और क़ौम की 'इज़्ज़त ! मीलाद !
दिल दिल में बसा है ! मीलाद !
घर घर में सजा है ! मीलाद !
जश्न-ए-नबी के मौक़े' पर महफ़िल-ए-ना'त सजाएँगे
जान से प्यारा है परचम, ये परचम लहराएँगे
बैठते उठते ज़िक्र-ए-नबी हर हालत में करना है
व्हाट्सएप फ़ेसबुक हर इक पर जश्न की डीपी लगाएँगे
गली गली मुहल्ले में मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
ख़ुशियाँ मनाओ सारे, झंडे लगाओ सारे
घर को सजाओ सारे बर्क़ी कुमकुमों से
टूट के उन को चाहा है, ज़िक्र-ए-नबी ना छोड़ेंगे
जश्न-ए-नबी की ख़ातिर हम हर दीवार को तोड़ेंगे
जज़्बा है मीलाद-ए-नबी, पैसा-वैसा चीज़ है क्या
जिन के सदक़े मिलता है, उन पर सब कुछ वारेंगे
गली गली मुहल्ले में मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
जिन से बहारें सारी हैं, जिन से रहमत के बादल
चमके सहाबा अहल-ए-बैत, उन के करम से सब हर पल
यौम-ए-सहाबा करते हैं, ना मानें मीलाद का दिन
ऐसे भी हैं लोग यहाँ, जो हैं 'अक़्लों से पैदल
मरहबा मरहबा !
कैसी रौनक़, कैसा मंज़र, कैसा मौसम देखा
आमिना का चाँद चमका, देखो नूर फैला
गली गली मुहल्ले में मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
उन के जुलूस में आया हूँ, हाथ में उन का झंडा है
'इश्क़-ए-नबी में चलना है, क्या रुकना क्या डरना है
प्यास, थकन और गर्मी से, मैं घबराऊँ ? ना रे ना
इस मीलाद की रैली से 'इश्क़-ए-रसूल बढ़ाना है
जब तलक ये चाँद-तारे झिलमिलाते जाएँगे
तब तलक जश्न-ए-विलादत हम मनाते जाएँगे
चार जानिब हम दिये घी के जलाते जाएँगे
घर तो घर सारे मुहल्ले को सजाते जाएँगे
'ईदे-ए-मीलादुन्नबी की शब चराग़ाँ कर के हम
क़ब्र नूर-ए-मुस्तफ़ा से जगमगाते जाएँगे
ना'त-ए-महबूब-ए-ख़ुदा सुनते सुनाते जाएँगे
या रसूलल्लाह का ना'रा लगाते जाएँगे
दुनिया चाहे कुछ भी कहे, जारी रहेगा अपना मिशन
इस पर जीना मरना है, जश्न-ए-विलादत की है लगन
हम ने, उजागर ! जगह जगह दिल से चर्चा करना है
लाज़िम है करना हम पर, ये है शि'आर-ए-अहल-ए-सुनन
गली गली मुहल्ले में मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
मीलाद हो रहा है, मीलाद हो रहा है
ईमान हमारा ! मीलाद !
दिल-जान से प्यारा ! मीलाद !
है नूर की बारिश ! मीलाद !
मोमिन की ख़्वाहिश ! मीलाद !
है मेरी मोहब्बत ! मीलाद !
और क़ौम की 'इज़्ज़त ! मीलाद !
दिल दिल में बसा है ! मीलाद !
घर घर में सजा है ! मीलाद !
शायर:
अल्लामा निसार अली उजागर
ना'त-ख़्वाँ:
हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
हाफ़िज़ अहसन क़ादरी
एक टिप्पणी छोड़ें
आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं




