भाषा:

खोजें

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

  • यह साझा करें:
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

आमिना का चाँद आया ! मरहबा ! मरहबा !
आमिना का चाँद आया ! मरहबा ! मरहबा !

सर पे सजा के 'अमामा
ना'लैन-ए-पाक लगा के
लब पे दुरूद सजा के
मीलाद करेंगे

मीलाद पे हर साल यही ना'रा लगेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

गलियाँ, बाज़ार सजे
मस्जिद, मीनार सजे
'आशिक़ों के घर हैं सजे
घर भी सजे, दिल भी सजे
'इश्क़ में मीलादी कहेगा

आ गए, आ गए, आए मेरे मुस्तफ़ा
आ गए, आ गए, आए मेरे मुस्तफ़ा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

दुनिया में तो मीलाद मनाते ही रहेंगे
ज़िक्र-ए-रसूल-ए-पाक सुनाते ही रहेंगे
जश्न-ए-नबी का हश्र में भी डंका बजेगा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

गली-गली मरहबा !
शहर-शहर मरहबा !

फ़लक के नज़ारो ! ज़मीं की बहारो !
सब 'ईदें मनाओ, हुज़ूर आ गए हैं
उठो ग़म के मारो ! चलो बे-सहारो !
ख़बर ये सुनाओ, हुज़ूर आ गए हैं

अनोखा निराला वो ज़ी-शान आया
वो सारे रसूलों का सुल्तान आया
अरे कज-कुलाहो ! अरे बादशाहो !
निगाहें झुकाओ, हुज़ूर आ गए हैं

हुवा चार-सू रहमतों का बसेरा
उजाला उजाला, सवेरा सवेरा
हलीमा को पहुँची ख़बर आमिना की
मेरे घर में आओ, हुज़ूर आ गए हैं

आ गए सरकार मेरे ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
आ गए दिलदार मेरे ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
सय्यिद-ओ-सरदार मेरे ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
आ गए ग़म-ख़्वार मेरे ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
आप मेरी शान हैं ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
आप ही पहचान हैं ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
आप मेरी आन हैं ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मोमिनों की जान हैं ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
वल्लाह ! ईमान हैं ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

मेरे सरकार आए ! मेरे दिलदार आए !
मेरे सरकार आए ! मेरे दिलदार आए !

नसीब चमके हैं फ़र्शियों के
कि 'अर्श के चाँद आ रहे हैं
झलक से जिन की फ़लक है रौशन
वो शम्स तशरीफ़ ला रहे हैं

ज़माना पलटा है, रुत भी बदली
फ़लक पे छाई हुई है बदली
तमाम जंगल, भरे हैं जल-थल
हर इक चमन लह लहा रहे हैं

निसार तेरी चहल-पहल पर
हज़ारों 'ईदें रबी-उल-अव्वल
सिवाए इब्लिस के जहाँ में
सभी तो ख़ुशियाँ मना रहे हैं

शब-ए-विलादत में सब मुसलमाँ
न क्यूँ करें जान-ओ-माल क़ुर्बां
अबू लहब जैसे सख़्त क़ाफ़िर
ख़ुशी में जब फ़ैज़ पा रहे हैं

ज़माने भर का ये क़ा'इदा है
कि जिस का खाना उसी का गाना

तेरा खावाँ, मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावाँ, या रसूलल्लाह !

हलीमा घर कदी वेखे, कदी सरकार नूँ वेखे
मैं केहड़ी सेज तेरे लै सजावाँ, या रसूलल्लाह !

ज़माने भर का ये क़ा'इदा है
कि जिस का खाना उसी का गाना
तो ने'मतें जिन की खा रहे हैं
उन्हीं के गीत हम भी गा रहे हैं

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

हम 'इश्क़ में जीते भी हैं, मरते भी हैं, सुन लो
कोई भी रुकावट हो, ए शैतान के यारो !
हर हाल में घर घर में ये मीलाद सजेगा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

सर पे सजा के 'अमामा
ना'लैन-ए-पाक लगा के
लब पे दुरूद सजा के
मीलाद करेंगे

आमिना का चाँद आया ! मरहबा !
आमिना का चाँद आया ! मरहबा !

है कौल-ए-सहाबा, इसे हम ज़िंदा रखेंगे
मीलाद पे हर साल जुलूसों में चलेंगे
फ़िरदौस में भी सिलसिला ये जारी रहेगा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

गलियाँ, बाज़ार सजे
मस्जिद, मीनार सजे
'आशिक़ों के घर हैं सजे
घर भी सजे, दिल भी सजे
'इश्क़ में मीलादी कहेगा

आ गए, आ गए, आए मेरे मुस्तफ़ा
आ गए, आ गए, आए मेरे मुस्तफ़ा

महफ़िल है सजी चारो तरफ़ जश्न-ए-नबी की
इस जश्न में दा'वत है बस 'उश्शाक़-ए-नबी की
मीलाद का मुन्किर तो कभी आ न सकेगा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

आ गए, आ गए, आए मेरे मुस्तफ़ा
आ गए, आ गए, आए मेरे मुस्तफ़ा

घर बार महल्ले को सजाएँगे हमेशा
यूँ महफ़िल-ए-मीलाद मनाएँगे हमेशा
जो जलता है इस से वो हमेशा ही जलेगा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा
मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

'उश्शाक़ निकल जाएँ अगर अपने घरों से
ग़ैरों को हटा देंगे अगर अपनी सफ़ो से
कौनैन में हर सम्त यही गूँज उठेगा

मीलाद था, मीलाद है, मीलाद रहेगा

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

एक टिप्पणी छोड़ें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy