मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !
मौला ! मौला ! मौला ! मौला !
मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में
ये दुनिया छोड़ दी हम ने तेरी ख़ातिर, मेरे मौला !
ये चाहत है कि मिल जाए सुकूँ अब तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! तेरा ही दीन इस दुनिया में फैलेगा
मैं अपनी जान जब क़ुर्बां करूँगा तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !
है मेरी मंज़िल-ए-मक़्सूद तेरी जन्नतुल-फ़िरदौस
कि ग़म और सख़्तियों को मैं ने झेला तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !
'अता कर तू हमें वो जज़्बा-ओ-हिम्मत कि कट जाएँ
जो हाइल है हर इक दरिया-ओ-सहरा तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !
रही ख़्वाहिश सदा मेरी कि अब हासिल शहादत हो
ये मेरी जान है हाज़िर, ऐ मौला ! तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में
मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !
शायर:
उबैदुर्रहमान शहीद
नशीद-ख़्वाँ:
शाहिद ख़त्ताब
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