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मेरे मौला तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में | ये दुनिया छोड़ दी हम ने तेरी ख़ातिर मेरे मौला

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मेरे मौला तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में | ये दुनिया छोड़ दी हम ने तेरी ख़ातिर मेरे मौला

मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !

मौला ! मौला ! मौला ! मौला !

मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में

ये दुनिया छोड़ दी हम ने तेरी ख़ातिर, मेरे मौला !
ये चाहत है कि मिल जाए सुकूँ अब तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !

मेरे मौला ! तेरा ही दीन इस दुनिया में फैलेगा
मैं अपनी जान जब क़ुर्बां करूँगा तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !

है मेरी मंज़िल-ए-मक़्सूद तेरी जन्नतुल-फ़िरदौस
कि ग़म और सख़्तियों को मैं ने झेला तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !

'अता कर तू हमें वो जज़्बा-ओ-हिम्मत कि कट जाएँ
जो हाइल है हर इक दरिया-ओ-सहरा तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !

रही ख़्वाहिश सदा मेरी कि अब हासिल शहादत हो
ये मेरी जान है हाज़िर, ऐ मौला ! तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! तेरी रहमत से निकला तेरे रस्ते में
करूँगा मैं मुकम्मल अपना वा'दा तेरे रस्ते में

मेरे मौला ! मेरे मौला !
मेरे मौला ! मेरे मौला !


शायर:

उबैदुर्रहमान शहीद

नशीद-ख़्वाँ:

शाहिद ख़त्ताब

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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